लोगों की धार्मिक भावनाएं

लोगों की धार्मिक भावनाएं इतनी हलकी क्यों होती है कि ढ़ोंग और धर्म की आड़ में हो रहे धन्धे की बात करते ही जलन होने लगती है। माँ-बहन की गाली पर उतर आते हैं। भक्तों! श्रद्धावानों! तुम्हारा धर्म तो असली वाला और खांटी वैज्ञानिक है, फिर काहे डरते हो? कहते हैं सोना और सच कितना घीसो चमकता है, तब भी।