शर्मा जी कहते हैं

“शर्मा जी कहते हैं, हम बदलेंगे और दुनिया बदल जाएगी. भैया! हम क्या हवा में बदलेंगे. हम समाज और आसपास से सीखकर-समझकर, संघर्ष और प्रेम के फलस्वरूप बदलते हैं.” लेखक कुमार अशोक का यह कथन कितना सही है, कितना गलत आप खुद जांचें. दुनिया में हम कोई निर्जन द्वीप में नहीं रह रहे कि वहां पहले खुद को अच्छे से बदल लो, फिर दुनिया में आ जाओ और बदल कर रख दो. दुनिया को बेहतर बनाने का तरीका है, जितनी भी समझ है उसी से शुरू करें.

गलत नहीं हो सकते ऐसा भी न सोचें. आप काम करेंगे, तो बेशक गलतियाँ होंगी. जब आप अपनी सोच-समझ के अनुसार अच्छा कार्य करेंगे, तो बेहतर ही परिणाम आयेंगे और दुनिया भी बेहतर बनेगी. यह बात सिर्फ इस लेख को पढ़कर ही नहीं, आपके अपने अनुभव से भी समझा जा सकता है.