भक्तों से सिम्पथी रखने की ज़रूरत

जब एक भक्त, एक तर्कशील और नास्तिक मनुष्य से बहस में हारने लगता है, तो वह अपने तर्क को बेहतर करने की जगह गाली-गलौज पर उतर आता है पता है क्यों? इसलिए नहीं कि वो तर्क करना नहीं जानता अथवा उसके पास तथ्य नहीं होते बल्कि इसलिए कि उसका धर्म और अंधश्रद्धा उसे ऐसा करने की ईजाजत नहीं देता वह जानबूझकर अपनी आँखों पर पट्टी बांधे रखता है और सच को देखना नहीं चाहता
इसलिए ऐसे लोगों से गुस्सा करने की जगह, उनसे सिम्पथी रखने की ज़रूरत है भले ही वह आपको कितना ही भला-बुरा कहता हो या कहता हो कि तुम लोग नरक में सडोगे