बलात्कार, आत्महत्या और हमारी मानसिकता

खबर एक। लड़की के साथ घर-घुसकर किया बलात्कार। लड़की ने की आत्महत्या। खबर दो। पुलिस ने नहीं की कार्यवाही। लड़की ने की आत्महत्या। ये दो खबर उत्तर प्रदेश की हैं। इसमें दोषी कहीं से लड़की नहीं है। पर बलात्कार के मामले में आत्महत्या वही क्यों कर रही है? लड़का क्यों आत्महत्या नहीं करता?
एक, तो भारत में बलात्कार पितृसत्ता और मर्दानगी को स्थापित करने का एक जरिया समझा जाता है। "महिला की ये मज़ाल" वाली पुरुषों की सोच यहाँ बहुत आम है।
दूसरा, यहाँ युवा सेक्स को लेकर कुंठित हैं। महिला के साथ बदला लेने, उन्हें नीचा दिखाने का सोच भी आम है। ..और इसका एकमात्र तरीका उन्हें बलात्कार, एसिड फेंकना आदि समझ में आता है। जो बिलकुल अमानवीय और जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। सेक्स के लिए, यहाँ हिंसा और जबरदस्ती को एकसेप्टबल समझा जाता है।
तीसरी। बलात्कार के बाद इज्ज़त पुरुष की नहीं जाती, जो दोषी है। बल्कि महिला की जाती है। ऐसा भारतीय समाज में स्थापित कर दिया गया। जहाँ एक तरफ तो नारी की पूजा की बात की जाती है। और दूसरी तरफ उसका दोयम दर्जा बनाये रखने की चाल सदियों से चली आ रही है।
चौथी। यहाँ की पुलिस भी इसी समाज से आती है। इसलिए पुलिस वाले भी ऐसी घटना को आम मानते हैं। यानि महिला के बलात्कार की सुचना का महत्व 10 हज़ार की चोरी वाली खबर से भी कम समझी जाती है।

ऐसा देश है हमारा और ऐसी गौरव पूर्ण परम्परायें। आज से नहीं, सदियों से चल रही है। बोलो भारत माता की जाय।
दोनों खबरों की लिंक नीचे कॉपी कर रहा हूँ, उसपर क्लिक कर न्यूज़ देख सकते हैं। काहे कि भक्त लोग भी आजकल तर्क और तथ्य की बात पूछने लगे हैं। यह अच्छा भी है।