व्यक्ति की प्रतिभा जन्मजात नहीं

किसी भी व्यक्ति में जन्मजात प्रतिभा नहीं होती, बल्कि सम्भावना होती है। जो उचित परवरिश, अवसर और संसाधन से यह अभिव्यक्त होती है।
...जैसे पेड-पौधों के बीज़ों में सम्भावना होती है।
यदि उन्हें सही से हवा, पानी, मिट्टी आदि मिलते हैं, तो वे अच्छे से विकसित हो पाते हैं, वरना नहीं।
वैसे ही जिन बच्चों को अच्छी परवरिश, संसाधन और अवसर मिलता है, वो सही से बढ़ते और विकसित होते हैं, नहीं तो कम।
दलितों और पिछड़ों के साथ यही बात हुई। एक साजिस के तहत उनको संसाधन और अवसर नहीं मिला। जिस कारण वे पिछड़ गए।

..और जब भारतीय संविधान के होने से, अब मिल रहा है, तो वे दिन ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।

इस धारणा के विपरीत सत्ताखोरों ने भारतीय मस्तिष्क में गलत विचार डाल दिया। ...और "पूत के पाँव पालने में ही दिख जाता है", "ईश्वर की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता" जैसे कहावतों को गढ़ा। जिससे इंसान अपने निम्न-जाति (ईश्वरकृत) में हुए जन्म को भी ईश्वरीय मान कर समझौता कर ले, बिना सवाल और विरोध के।