एक नस्लीय दोहरा व्यवहार

गाय को माँ मानें और भैंस को मार दें।बैल को बाप मानें और भैंसा की बलि दे दें। ये दोहरा चरित्र क्या गौरवशाली परंपरा है अथवा एक नस्लीय द्वेषपूर्ण व्यवहार? जहाँ सफ़ेद और गोरा को श्रेष्ठ माना जाता है और काला को हीन। आपके पास कोई तर्कपूर्ण और गैर-भक्तों वाला ज़वाब हो, तो कृपया बताएं।आखिर गाय क्यों पूजनीय है और भैंस तथा उसके बछड़े क्यों बलि देने के लिए हैंसिर्फ इसलिए तो नहीं कि आपकी नस्लीय श्रेष्ठता और द्वेष से यह मेल खाती है।