प्रेम करना 'अपराध' क्यों हो!

अंकित की हत्या से कई सवाल उपजे हैं। धर्म की रुढिवादिता को लेकर। व्यक्ति की नैसर्गिक प्रेम करने की आज़ादी को लेकर। धर्म और संस्कृति के झूठे आवरण को लेकर जो सत्ता के हाथों एक टूल की तरह इस्तेमाल हो जाते हैं और आम इनसान बस इसका शिकार होकर रह जाता है। इन्हीं विषयों पर पढ़ें श्रीनिवास श्री का यह विचारोतेजक लेख।


'अपराध को धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए', यह बात कहने में जितना भी अच्छा लगे, लेकिन यह कोई सर्वमान्य सिद्धांत या आदर्श नहीं हो सकता वैसे भी अपराधी यदि विधर्मी हो, तो इसे याद रखना कठिन हो जाता है। मगर यदि किसी की हत्या उसकी मजहबी पहचान के कारण इतर धर्म के लोगों ने की हो, तो इसमें धर्म व संप्रदाय की बात तो उठेगी ही और इसे गलत भी नहीं कह सकते। हां, ऐसे अपराध के लिए पूरे समुदाय या धर्म को दोषी ठहराना गलत है। पर जिन्हें धर्म, धार्मिक उन्माद और घृणा की राजनीति करनी है; या जिनके मानस में भिन्न धर्म के प्रति विद्वेष भर दिया गया है।

संभव है, अंकित की मुसलिम प्रेमिका के परिजनों ने हत्या  उसके हिंदू होने के कारण ही की है। पर यही सच है, ऐसा मान लेना गलत भी हो सकता है। इसलिए कि हमारे देश में, खास कर हिंदू समाज में तो इतर जाति में विवाह भी वर्जित है, अपराध है; बल्कि प्रेम करना ही अपराध है। और लड़की का ऐसा करना तो महाअपराध है। इससे हमारी नाक कट जाती है, प्रतिष्ठा गिर जाती है। इतर क्षेत्र, भाषा, प्रांत और नस्लों के बीच विवाह हमें पसंद नहीं। पर कमाल है कि ऐसे मामलों में लोग अपनी बहन-बेटी की हत्या तक कर डालते हैं, पर शायद ही इसके लिए कोई अपने घर के लड़के का खून बहाता है।


मेरी नजर में यह पितृसत्तात्मक समाज और मानसिकता से जुड़ा मसला ज्यादा है, बजाय धार्मिक नफरत के। और हत्यारे यदि मजहबी जुनूनी हों तब भी, इस हादसे के बहाने समाज में तनाव फैलाने का प्रयास कर रहे लोग अपना बेटा खो चुके अंकित के पिता और परिवार की इस अपील पर- कि 'इसे मजहबी रंग नहीं दिया जाये'- ध्यान दें, उस पर अमल करें, यही बेहतर होगा। साथ ही, मनुष्य मात्र की नैषर्गिक प्रवृत्ति- प्रेम पर पहरा लगाने की घटिया परिपाटी के खिलाफ मुखर हों। फिर अंकित की दोस्त या प्रेमिका के आचरण पर भी तो गौर करें, जिसने अंकित की हत्या करनेवाले अपने पिता एवं अन्य परिजनों के खिलाफ शिकायत की, गवाही देने को तैयार है।

श्रीनिवास श्री

(वे पत्रकार हैं और समसामयिक मुद्दों तथा वैकल्पिक सामाजिक व्यवस्था पर सोशल मीडिया में काफी सक्रिय हैं।)