इंसानियत का दुश्मन बनता धर्म

जो लोग भजन संध्याओं/भागवत कथाओं का आयोजन करते हैं वो कोई धार्मिक लोग नहीं होते, बल्कि ये लोग अपनी पूँजी में मदमस्त होकर अपने अहंकार के प्रदर्शनकारी होते हैं। किसी की आस्था अपनी निजी होती है और एकांत में बैठकर ध्यान लगाकर चेतना को तलाशने वाले लोग काफी हद तक धार्मिक माने जा सकते है।

मैँ धार्मिक गलियों की अंधेरगर्दी में घूमकर इंसान बना हूँ इसलिए ये बातें बता रहा हूँ। कथावाचक व भजन गाने वाले लोगों को अगर आप धर्म से जोड़कर देख रहे हो तो यह आपकी भारी भूल है। असल मे ये लोग एक तरह के व्यापारी होते है जो राग व संगीत का धर्म की आड़ में व्यापार करके अपना पेट पाल रहे हैं।


ये जो हज, अमरनाथ, रोम आदि की यात्रा करके हाजी, गुरु, संत आदि नामों से विख्यात होने की कोशिश करते हैं, वो या तो पूंजी के बल पर अपने अहम को आपके ऊपर थोपना चाहते हैं या पूँजी हासिल करने के बाद भी असंतुष्ट इंसान है, जो अपनी मानसिक कमजोरी का प्रदर्शन कर रहे होते हैं।

धार्मिक यात्राएं चमत्कारों से लबरेज होकर कोई भविष्य का बेहतर परिणाम देने वाली नहीं होती है। यह एक तरह का धार्मिक पूंजीवाद है। यूरोप ने बदनाम चर्च की अव्यवस्था का इलाज ढूंढकर वेटिकन में दायरा सीमित कर दिया है। हम अभी भी धर्म का डेस्टिनेशन तय नहीं कर पा रहे हैं।
धार्मिक यात्राएं धर्मगुरुओं के रिश्तेदारों के लिए रिलीजियस टूरिज्म है। सियासतदानों के लिए सियासत की राह है। धनकुबेरों के लिए सोशल रेपुटेशन हासिल करने की सीढियां हैं और उत्सवों की भूखी जनता के लिये मनोरंजन का साधन है। पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के लिए टाइमपास करने का साधन है और नौकरियों से नाकाबिल युवाओं के लिए नशे व अपराध की दुनियां में अवतरित होने की पहली सीढ़ी है।
आप खुद पढ़े-लिखे लोग हैं। येरुशलम से लेकर थाईलैंड तक ही यीशु, अल्लाह व भगवान पैदा हुए थे और यहीं सबसे ज्यादा मार-काट मची हुई है जहाँ दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब लोग बसते हैं। कदम-कदम पर जाति व धर्म पूछकर इंसानों को जलील किया जा रहा है। हर पल जीने की निगाह तलाशते दरिद्रता भरे जीवन को जी रहे लोगों को धर्म व जाति पूछकर जीने का प्रमाणपत्र बांटने वाले गुंडे/मवाली/आतंकी इसी क्षेत्र में हैं।


माननीय शरद यादव जी ने सही कहा है। अगर तुम्हारा यीशु, अल्लाह, भगवान कहीं है तो उनसे मेरी एकबार मुलाकात करवा दीजिये। मैँ हाथ जोड़कर उनको कहना चाहता हूँ कि आप हमारा पीछा छोड़ दीजिए।
– बबलू सागर