मानवता से बड़ा न तो कोई ईश्वर है और न तो कोई धर्म

भारत भर में तकरीबन 1 लाख शिक्षित अशिक्षित कुशिक्षित ऐसे चिकित्सक हैं जो बड़ी से बड़ी असाध्य बीमारी का गारंटीड ईलाज करते हैं। करीब इतने ही बाबा और तांत्रिक हैं जो बड़ी से बड़ी परेशानी को फूँक मारकर ठीक कर सकते हैं।
भारत देश में प्रत्येक 10-15 किलोमीटर की दूरी पर कोई न कोई सिद्धस्थान, चबूतरा, मजार या ऐसी मंदिर भी जरूर मिलेगी, जहाँ सिर्फ मत्था टेकने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। भारत के गाँवों में लगभग हर तीसरे घर में झाड़ फूँक मंत्र टोने टोटके का एक एक्सपर्ट भी जरूर मिल जाएगा। देश में कम से कम 100-200 ऐसी नदियाँ भी हैंजिसमें नहाने मात्र से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

आश्चर्य है कि इतना सब होने के बाद भी देश के अस्पतालों में भीड़ लगातार बढ़ रही है। विभिन्न बीमारियों की चपेट में आने से लेकर मरने वालों तक की तादाद कई गुनी हो गई है।।वैश्विक रिपोर्ट कहती है कि भारत के लोग अन्य दर्जनों देशों के मुकाबले अधिक दुखी और बीमार हैं और जो देश लोगों की खुशहाली के मामले में सबसे आगे है,वहाँ तंत्र मंत्र जादू टोना फकीर नीम हकीम तो छोड़ो लोग भगवान को भी नहीं मानते।

यह चित्र मात्र प्रतीकात्मक है। 




                                   
फिर भी वो हमसे ज्यादा खुश हैं,ज्यादा जीते हैं,ज्यादा धनवान हैं। क्यों? क्योंकि वो हमारी तरह दकियानूसी और अंधविश्वासी नहीं हैं। जिस देश में एक भी ईश्वर ने जन्म नहीं लिया,वहां छोटी छोटी बच्चियों से बलात्कार की घटनाएं कभी नहीं हुईं और हमारे यहाँ 33 करोड़ देवी देवता तो सिर्फ हिंदुओं के हैं, मुसलमानों जैनों ईसाइयों सबको जोड़ दें तो पता नहीं गिनती कितनी होगी, किन्तु फिर भी हमारे यहाँ रोज बेटियों से बलात्कार हो रहे हैं, हत्याएं हो रही हैं,जघन्य से जघन्य पाप और व्यभिचार हो रहे हैं।

श्रद्धा और विश्वास अपनी जगह है लेकिन मानवता से बड़ा न तो कोई ईश्वर है और न तो कोई धर्म। उसका पालन कीजिये और ढ़ोंग ढकोसलों से बाहर निकलिए।
– डॉ. दीपक अग्रवाल