क्यों धार्मिक और नास्तिक बाबा लोग गरीबों को धर्म- संस्कृति का पाठ पढ़ाते हैं ?

धार्मिक बाबा लोग गरीबों को मोह माया छोड़ने की सलाह देते हैं, अमीरों को नहीं। तर्कवादी नास्तिक बाबा लोग भी गरीबों को ही धर्म और सँस्कृति छोड़ने की सलाह देते हैं, अमीरों को नहीं। गरीबों ने इनकी सुनकर यह सब छोड़ भी दिया, अब न उनके पास अपना धर्म और सँस्कृति है न धन संपत्ति। ये देखकर वे दोनों तरह के बाबा बड़े प्रसन्न हैं।


तस्वीर प्रतीकात्मक है। तस्वीर गूगल से साभार।

याद रखिये अपने धर्म सँस्कृति से ही अपना धन संपत्ति निर्मित होता है। दुनिया या समाज मे कहीं भी नजर दौड़ाकर देख लीजिए। सँस्कृति और धर्म पर जिनका अधिकार है वे ही राज करते हैं
, बाकी लोग उनकी कृपा पर निर्भर होते हैं।
अपना धर्म और सँस्कृति को उभारिये। धर्म और सँस्कृति मानव शक्ति के सबसे बड़े संचालक हैं इनकी उपेक्षा करके आप कहीं नहीं पहुंचेंगे।
बहुजनों के प्रतिभाशाली युवाओं के 1% को नास्तिक बनाकर और शेष 99 प्रतिशत को शोषक धर्म का भक्त बनाकर सीधे सीधे खेल से ही बाहर खींच लिया जाता है।

ऐसे में बहुजन अपनी खोई सँस्कृति और खोए धर्म को कब जिंदा कर सकेंगे?

बहुजन युवाओं! जब तक आप केपिटल की अपनी समझ मे सोशल केपिटल और कल्चरल केपिटल को शामिल नहीं करेंगे तब तक आप इन दोनो तरह के बाबाओं के हाथों लुटते रहेंगे।

संजय श्रमण