क्या आपकी नफ़रत, आपके प्रेम करने में बाधक है?

एक जातिवादी-साम्प्रदायिक-आर्थिक-शोषक समाज में प्रेम जन्म ले ही नहीं सकता। जो किसी इंसान से उसकी जाति या मजहब की वजह से नफरत कर सकता है, वह इंसान दुनिया में किसी से प्रेम कर ही नहीं सकता।

न प्रेमिका से, ना अपने बच्चों से, ना संसार से।

जो दिमाग अपनी मूर्ख नफरत को नहीं पहचान सकता, उस दिमाग में प्रेम जन्म ले ही नहीं सकता।

देख लीजिये अपने चारों तरफ!

जो नफरत करने वाले हैं, वो सबसे नफरत करते हैं।

जो प्रेम करने वाले हैं, वो सबसे प्रेम करते हैं।

वह इसलिए क्योंकि रोशनी और अँधेरा एक साथ रह ही नहीं सकते।

तस्वीर Steam Trading Cards से साभार।

आप ध्यान दीजियेगा! जातिवादी इंसान साम्प्रदायिक भी होगा, औरतों की बराबरी से चिढने वाला भी होगा और गरीबों से चिढ़ता भी होगा।

..और जो इंसान जाति को नहीं मानता होगा, वह साम्प्रदायिकता को भी नहीं मानने वाला होगा, वह गरीबों से प्यार करता होगा, मदों और औरतों की बराबरी का समर्थक  भी होगा।

एक जातिवादी साम्प्रदायिक आर्थिक शोषक समाज में प्रेम जन्म ले ही नहीं सकता।

ऐसे समाज में बलात्कार, औरतों की गुलामी, पर्दा, बुरखा, पिटाई ही रहेगी।

अपनी नफरत को पहचानिए! यह आपको दुःख, हिंसा और अँधेरे में डुबा देती है।